मिथुन लग्न में राहु का द्वितीय भाव गोचर

राहु का द्वितीय भाव में गोचर धन, वाणी और मूल्यों पर तीव्र ध्यान लाता है। आर्थिक वृद्धि की इच्छा तेज होती है और अक्सर अपरंपरागत तरीकों से लाभ की सोच बनती है। वाणी प्रभावशाली हो सकती है, लेकिन अतिशयोक्ति से बचना जरूरी है। यह समय रणनीति और नवाचार को फल देता है, बशर्ते नैतिक सीमाएँ स्पष्ट रहें।

मुख्य व्यक्तित्व

  • आर्थिक सुरक्षा की तीव्र चाह
  • मूल्य-प्रणाली में परिवर्तन
  • आकर्षक लेकिन तीखी वाणी
  • भौतिक परिणामों से लगाव

करियर

  • अपरंपरागत आय अवसर
  • कौशल का मुद्रीकरण
  • सेल्स, मीडिया या टेक में लाभ
  • प्रतिष्ठा-जोखिम वाले शॉर्टकट से बचें

रिश्ते

  • परिवार में धन पर चर्चा
  • वाणी से गलतफहमी की आशंका
  • भौतिक उपलब्धियों से स्वयं को सिद्ध करने की चाह
  • संयमित संवाद आवश्यक

वित्त

  • धन संचय की तीव्र प्रवृत्ति
  • कैश फ्लो में उतार-चढ़ाव
  • जोखिम लेने की इच्छा
  • वित्तीय अनुशासन जरूरी

मानसिक / आंतरिक स्थिति

  • सुरक्षा को लेकर चिंता
  • धन से जुड़े बेचैन विचार
  • लालच बनाम संतोष का द्वंद्व
  • जमीनीपन से स्थिरता

Strengths

  • रणनीतिक कमाई
  • प्रभावशाली संवाद
  • संसाधनशीलता
  • धन-प्रेरणा

Challenges

  • लालच
  • अतिशयोक्तिपूर्ण वाणी
  • आर्थिक अस्थिरता
  • मूल्य भ्रम

Closing Insight: यह गोचर धन और प्रभाव की लालसा को तेज करता है। नैतिक स्पष्टता से महत्वाकांक्षा स्थायी समृद्धि बनती है।

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