तुला लग्न के लिए केतु का नवम भाव में गोचर
जब केतु तुला लग्न के नवम भाव में गोचर करता है, तो आस्थाएँ, गुरु-मार्गदर्शन और दर्शन वैराग्य से परिष्कृत होते हैं। अंधविश्वास घटता है और अनुभव-आधारित बुद्धि बढ़ती है। औपचारिक धर्म से दूरी, पर आंतरिक नैतिकता मजबूत होती है। गुरु या पिता से कर्मिक दूरी संभव है। यह समय आत्म-अन्वेषण और अभ्यास-आधारित अध्ययन के लिए उपयुक्त है।
मूल व्यक्तित्व
- कठोर मान्यताओं से दूरी
- आंतरिक नैतिकता प्रमुख
- अनुभव-आधारित सत्य
- स्वतंत्र सोच का विकास
आस्था व अध्यात्म
- सिद्धांतों पर प्रश्न
- उपदेश से अधिक अभ्यास
- व्यक्तिगत साधना गहरी
- निराशावाद से बचें
शिक्षा व अध्ययन
- चयनात्मक उच्च अध्ययन
- स्वाध्याय अनुकूल
- व्यावहारिक ज्ञान पर ध्यान
- निरंतरता आवश्यक
गुरु व पिता
- भावनात्मक दूरी संभव
- कर्मिक सीख
- निर्भरता बिना सम्मान
- सीमाएँ सहायक
मानसिक स्थिति
- वैराग्य से स्पष्टता
- कट्टरता में कमी
- शांत आत्मविश्वास
- ग्राउंडिंग से आस्था स्थिर
Strengths
- स्वतंत्र विवेक
- प्रामाणिक अध्यात्म
- नैतिक स्पष्टता
- व्यावहारिक ज्ञान
Challenges
- मार्गदर्शन की कमी
- आस्था भ्रम
- गुरु से दूरी
- प्रेरणा में उतार-चढ़ाव
Closing Insight: यह गोचर विश्वासों को परिष्कृत करता है। जागरूकता से केतु वैराग्य को जीवित बुद्धि में बदल देता है।
Ketu Transit › Libra Ascendant › House 10
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